Friday, February 14, 2014

खुशियों का तोहफा

आज सुबह पूजा कर के कल्याणी देवी कमरे मे बैठ गयीं | ठण्ड कुछ ज्यादा थी तो कम्बल ओढ़ कर आराम से कमरे मे गूंज रही गायत्री मन्त्र का आनंद ले रही थी | आँखे बंद कर के वो पूरी तरह से गायत्री मन्त्र मे डूब चुकी थीं तभी अचानक खट-खट की आवाज से उन्होंने आँखे खोली | कोई दरवाजा खटखटा रहा था | बहू रसोई मे थी और पतिदेव पूजा कर रहे थे सो उनको ही मन मार कर कम्बल से निकलना पड़ा | अच्छे से खुद को शाल मे लपेटते हुए उन्होंने गेट खोला तो चौंक गईं | एक मुस्कुराता हुआ आदमी सुन्दर सा गुलाब के फूलों का गुलदस्ता लिए खड़ा था | कल्याणी देवी सोचने लगीं अरे ! ये किसने भेजा बड़ी असमंजस की स्थिति मे उन्होंने वो गुलदस्ता ले लिया उसके साथ एक और पैकेट था | वो आदमी सब दे कर चला गया अभी कल्याणी देवी अन्दर भी नही आ पायीं कि फोन बजने लगा, जल्दी से अन्दर आ कर उन्होंने फोन उठा लिया |
धीरे से आवाज आई - हेल्लो ..!!
"हेल्लो..कौन ??" उधर से बहुत धीमी आवाज आई थी सो कल्याणी देवी पहचान नहीं पायीं |
"मम्मी मै हूँ "...!!
"अरे !! तुम ?? तो इतना धीरे धीरे क्यों बोल रहे हो"..?.
"मम्मी सुनिए .. अभी-अभी कुछ मिला आप को"..?
"हाँ..हाँ .. तो ये सब तुमने भेजा है"..?हाँ .. आप ये सब 'उसे' (बहू) दीजिए अभी और हाँ .. फोन का स्पीकर और फ्रंट वाला कैमरा ऑन कर दीजिए जरा मै भी तो उसके चेहरे का रंग देखूँ | अब कल्याणी देवी सब समझ गयीं थीं | वो टीवी पर देख रही थीं ..कई दिनों से कई 'डे' मनाये जा रहे थे तो आज सबसे बड़ा वाला 'डे'.. वैलेंटाइन डे' है उसी का तोहफा भेजा था सुपुत्र जी ने खैर..वो भारी सा गुलदस्ता लिए रसोई मे पहुँच गयीं, बहू ने जैसे ही घूम कर अपनी सासू माँ को देखा..फोन से आवाज आई "हैप्पी वैलेंटाइन डे" बहू चौंक पड़ी सामने ही सुपुत्र जी स्काइप पर मुस्कुरा रहे थे | बहुरानी की खुशी का ठिकाना नही था ..वो खुशी से चीख पड़ी उनकी खुशी देख कर कल्याणी देवी की आँखे भी भीग गई, अब बारी थी पैकेट खोलने की उसमे से एक प्यारा सा कुशन निकला जिस देख कर बहुरानी ने उसे दिल से लगा लिया उस पर उन दोनों की तस्वीर थी और एक चोकलेट का डिब्बा भी |
आज घर प्रेम की मिठास और गुलाब की सुगंध से भर गया है | प्रेम का ये रंग दोनों के जीवन मे यूँ ही बना रहे दिल से आशीर्वाद देते हुए बेटे-बहू को स्काइप पर अकेला छोड़ कर कल्याणी देवी अपने कमरे मे आ गयीं | कुछ सोच कर उनकी आँखों में दो बूँद आँसू आ गये जिसे उन्होंने आँचल से पोंछा और फिर से गायत्री मंत्र सुनने लगीं | बेटे बहू की हँसी की आवाज अब भी आ रही थी |

मीना पाठक

Tuesday, February 11, 2014

दो मुक्तक

भले कुछ भी लिखू लिख के मिटा देती हूँ
इसी जद्दोजहद मे वक्त गँवा देती हूँ
नाराज शब्द हुए मेरी कलम से शायद
हाथ आते ही हर वक्त सदा देती हूँ ||*

मेरे हर शब्द पर, ऊँगली उठाना छोड़ दो  
कलम का दिल बड़ा कोमल, दुखाना छोड़ दो  
मेरे जज़्बात की छत, कांपती है खौफ से 

हिकारत की ज़रा बिजली, गिराना छोड़ दो ||*

Friday, February 7, 2014

वंदना


हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
विद्द्या का मुझको भी वरदान दे माँ

करूँ मै भी सेवा तेरी उम्र भर
मुझमे भी ऐसा कोई
भाव दे माँ
हे शारदे माँ , .......

चलूँ मै भी हरदम सत्यपथ पर
कभी भी न मुझसे कोई चूक हो माँ
हे शारदे माँ ,...........

दिखें जो दुखी-दीन आगे मेरे
कुछ सेवा उनकी भी मै कर सकूं माँ
हे शारदे माँ ,...............

जिह्वा जो खोलूँ तू वाँणी मे हो
चले जो कलम तो तू शब्द दे माँ
हे शारदे माँ, .............

सुख,स्वास्थ,शान्ति सभी को मिले
हर इक को ऐसा ही वरदान दे माँ
हे शारदे माँ ,............

मीना पाठक
चित्र-गूगल


Tuesday, January 7, 2014

आप सब का नया साल शुभ हो

मुट्ठी से रेत की तरह
फिसल गया ये साल भी
पिछले साल की तरह,
वही तल्खियाँ, रुसवाइयाँ
आरोप, प्रत्यारोप,बिलबिलाते दिन
लिजलिजाती रातें, दर्द, कराहें
दे गया सौगात में |

सोचा था पिछले साल भी
होगा खुशहाल, बेमिशाल
लाजवाब आने वाला साल
,
भर लूँगी खुशियों से दामन
महकेगा फूलों से घर आँगन
खुले केशों से बूँदें टपकेंगी
दूँगी तुलसी के चौरा में पानी
बन के रहूँगी राजा की रानी |

हो गया फिर से आत्मा का चीरहरण
केश तो खुले पर द्रोपदी की तरह
कराहों, चीखों से भर गया घर आँगन
आपमान की ज्वाला से दहकने लगा दामन
भर गया रगों में नफरत का जहर
हाहाकार कर उठा अंतर्मन, पर
रह गई मन की बात मन में
कह ना सकी किसी से अपनी उलझन |

लो आ गया फिर से नया साल
जागी है फिर से दिल में आस
लाएगा खुशियाँ अपार
मिटेगा मन से संताप
दहकाए न कलुषित शब्दों का ताप
दे ये नया साल खुशियों की सौगात |

हो
, माँ शारदे की अनुकम्पा
बोल उठें शब्द बेशुमार
मेघ घननघन बरसे
कल-कल सरिता बहे
धरती धनी चूनर ओढ़े
फिर,
नाच उठे मन मयूर
शब्द झरें बन कर फूल
गाये पपीहा मंगल गीत
आने वाले साल का
हर दिन हो शुभ !!!