Monday, June 17, 2013

अपने पापा के नाम एक पत्र







                                              एक पत्र अपने पापा के नाम  


आदरणीय पापा जी

                          सादर चरणस्पर्श



मैं यहाँ पर कुशल पूर्वक रहती हुई ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि आप जहाँ कहीं भी हों सकुशल हों |
पापा आप कैसे हैं ? इतने दिनों से आप की कोई खबर नही | आप की बहुत याद आती है पापा. आप हमें छोड़ कर क्यों चले गये ? आपने एक बार भी नही सोचा की माँ आप के बिना अकेले कैसे रहेगी, हमसब भाई-बहनों को वो अकेले कैसे पालेगी, एक बार तो सोचा होता आप ने पापा | मैं ही कुछ बड़ी थी बाकी दोनों बहने छोटी थी और भाई तो मात्र ग्यारह महीने का था, जब आप हमें छोड़ गये थे |
पापा अब देखिये ना आ कर कि हम सब बड़े हों गये हैं और समझदार भी | बस् एक बार आप आ जाइये पापा, मेरी बहुत तमन्ना है कि एक बार फिर से आप मुझे अपने सीने से लगा कर मेरे सिर पर अपना स्नेह भरा हाथ रख दें | बहुत याद आती है आप की पापा, कोई भी दिन आप की याद के बिना नही गुजरता है | अकेले छुप-छुप कर रोती हूँ, अगर बच्चों ने देख लिया तो मुंह घूमा के आँसू पोंछ लेती हूँ |
पापा .. मुझे आप की सब बाते याद हैं, जब माँ ने आप से एक अच्छी साड़ी की फरमाइश  की थी तब आप ने कितने प्यार से माँ को समझा दिया था कि
तुम जैसी भी साड़ी पहन लो बहुत अच्छी लगती हों और माँ मुस्कुरा के रह गई थी | वो बात भी याद है मुझे जब चाचा के असमय सफ़ेद हुए बालों को कलर लगा के काला किया था आप ने और फिर उनके बालों को धो कर एक-एक बाल हटा-हटा कर आप देख रहे थे कि कहीं कोई बाल सफ़ेद तो नही रह गया | इंटरव्यू में ओवर एज कह के निकाल ना दिया जाए चाचा ये डर था आप के मन में इसी लिए आप ने ये सब किया था और आप के प्रयास से चाचा को सरकारी नौकरी मिल गयी थी | अब तो वो भी रिटायर होने वाले है | मुझे सब याद है पापा आप को ही मेरी याद नहीं आती तभी तो आप मेरी सुध नहीं लेते कभी |
पापा जब आप थे तब हमारे पास बहुत सी सुविधाएँ नही थीं पर आप का हाथ था हमारे सिर पर तो किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होती थी, आज हमारे पास सब कुछ हैं पर आप नही हैं तो कुछ भी नही है पापा कुछ भी नही ......
पहले तो आप मेरे सपने में आ जाते थे पर अब तो आप सपने में भी नहीं आते पापा | रोज सोच के सोती हूँ कि आज रात को सपने में जरूर मिलूँगी आप से पर सुबह उठ के निराश हो जाती हूँ, थोड़ी देर उदास हो कर बैठी रहती हूँ फिर अपने काम में लग जाती हूँ | आप तो मुझे बहुत प्यार करते थे पापा, फिर मुझे अकेली क्यूँ छोड़ गये आप ?
जब भी दुखी होती हूँ आप को याद कर के रोती हूँ कि अगर आप होते तो मैं अपने आप को यूँ अकेला और  कमजोर न महसूस करती | सारी दुनिया दुःख में भगवान को याद करती है पर मुझे आप याद आतें हैं पापा, जार-जार रोती हूँ आप को याद कर के | अब तो थक चुकी हूँ रो-रो कर, आप नहीं आएंगे मुझे पता है, अब तो एक ही रास्ता है आप से मिलने का ............................
                                               मुझे ही आना होगा आप के पास | वहीं आ कर आप से लिपट कर जी भर के रोऊँगी और अपने दिल की सारी बातें आप से कहूँगी जो अब तक किसी से नहीं कह पाई | कोई मुझे नहीं समझता पर आप मुझे अच्छी तरह समझते हैं पापा, मेरे दिल की हर बात समझते हैं आप, मुझे पता है | आप से मिल कर मुझे शान्ती मिलेगी और सभी दुखों से छुटकारा भी ........................
मैं ही आऊँगी पापा ..... मैं ही आऊँगी आप के पास .... मेरा इन्तजार कीजियेगा पापा .......

                                                 आप की लाडली
                                                   मीना