Wednesday, June 3, 2020

दोहे













भोर हुयी दिनकर उठे, खिले कुसुम हर ओर|
फूटी आशा की किरण, नाचा मन का मोर ||

मन का स्वामी चन्द्रमा, भौंराए नित गोल|
क्यों ना बहके मन मेरा, पंछी करे किलोल ||

मीना पाठक

(चित्र-साभार गूगल) 

14 comments:

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    1. धन्यवाद पल्लवी जी

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  2. दोहों से महत्वपूर्ण संदेश । बधाई ।

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    1. धन्यवाद आदरणीय सुनील जी

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    1. धन्यवाद संगीता जी

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  4. बहुत सुंदर दोहों से पुनः ब्लोग शुरू किया है बहुत शुभकामनाएँ ...

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    1. धन्यवाद आदरणीय दिगंबर जी

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